Skip to main content

Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम
जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी

✍✍ मयंक जैन


Comments

Popular posts from this blog

Girls

घर से लेकर कालेज तक हमेशा दहशत में रहतीं हूं
क्या यें मेरी गल्ती हैं कि मैं एक लड़का नहीं बल्कि एक लड़की हूं.... मंदिरों में भगवान के रूप में पूजी जाती हूं...
और बाहर आते ही एक पटाखा और माल कही जाती हू... वैसे तो मुझे लक्ष्मी का स्वरूप कहा जाता है..
फिर क्यों मुझे दहेज के लिए मजबूर किया जाता हैं.. मुझे ही सरस्वती लक्ष्मी और दुर्गा कहा जाता है..
फिर क्यों मुझे मां के गर्भ में ही मार दिया जाता है.. लड़कियां देवी का रूप होती है, ये केवल इंसान की जुबान पर ही रह गया है...
और आज इंसान इंसान नहीं, जानवर से भी बत्तर हो गया है... घर से लेकर कालेज तक हमेशा दहशत में रहतीं हूं
क्या यें मेरी गल्ती हैं कि मैं एक लड़का नहीं बल्कि एक लड़की हूं....
✍✍✍✍ मयंक जैन

Husn

कुछ तो कशिश जरूर रही होगी तुम्हारे हुस्न में
वरना यूं ही हर कोई तुम्हारा मुरीद नहीं होता...

✍✍✍✍  मयंक जैन