12 July 2018

khafa


मेरी खता से खफा क्या हुई तुम...
कि इस दिल ने धड़कना भी छोड़ दिया है...!

✍✍✍✍  मयंक जैन

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जो दिल की धड़कनों से समझ जाते हैं उन्हें लफ्जो की जरूरत नहीं प्यार अंधा होता है बहरा नहीं...! ✍✍ मयंक जैन