1 June 2018

Sitam

चांद की चांदनी में देंखा था तुम्हें उस रोज
क्या सितम ढा रही थी तुम उस रोज
जब पास जाके देखा तुम्हें...
तो चुड़ैल की अम्मा लग रही थी तुम उस रोज...
✍✍✍✍  मयंक जैन

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Lafz

जो दिल की धड़कनों से समझ जाते हैं उन्हें लफ्जो की जरूरत नहीं प्यार अंधा होता है बहरा नहीं...! ✍✍ मयंक जैन