4 July 2018

Husn


किन अल्फाजों में  बयां करूं तेरे हुस्न को
तेरे आगे तो जन्नत की हूर भी फीकी लगती हैं


✍✍✍✍  मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन