18 July 2018

Ajnabi


जो हमारी मोहब्बत में कभी पागल हुआ करते थे
आज हमसे मिलते है अजनबियों की तरह...!

✍✍✍✍  मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन