3 June 2018

muhabbat

तुझसे मुझे मुहब्बत क्या हुई ऐ सनम
प्यार के दरबार में हम तो गुनहगार हों गयें....

✍✍✍✍ मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन