24 June 2018

Jameer

अपने जमीर का कद ऊंचा रखो जनाब
वैसे तो इंसान की परछाई भी उसकी काया से बड़ी होती हैं

✍✍✍✍  मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन