11 June 2018

Ibadat

आशिकी भी क्या चीज है यारो
जो कल तक करती थी मेरे लिए दोनों हाथों से इवादत
आज मुझे पहचानने से भी इंकार कर रही हैं....

✍✍✍✍  मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन