22 June 2018

Dil

काश ये दिल चिराग की तरह होता
जब जब इसे घिसते मेरे महबूब केवल तू ही निकलता

✍✍✍✍  मयंक जैन

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Shatranj ka khel

मेरी जिंदगी कोई शतरंज का खेल नहीं है ऐ सनम जहां मोहरा भी तेरे हाथ में और चाल भी तेरी ✍✍ मयंक जैन